दिल्ली की जहरीली हवा को ऑड इवेन की कड़वी दवा
24 दिसंबर को अरविंद केजरीवाल के 3 फ्लैग स्टॉफ रोड के सरकारी बंगले पर गहमा-गहमी भरा माहौल था। मीडिया के दर्जनों कैमरे और पत्रकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले के बाहर बने पोटा केबिन में जमा हो चुके थे। सुबह के ग्यारह बजे अरविंद केजरीवाल अपने साथी मंत्री गोपाल राय और सतेंद्र जैन के साथ ऑड इवेन फार्मूले को लागू करने का ब्लू प्रिंट बताने लगे। ऑड इवेन फार्मूले के तहत केंद्रीय मंत्रियों और दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को छूट दिए जाने वाली लिस्ट पढ़ते हुए वे अचानक रुके और बोले कि मै खुद और हमारे मंत्री ऑड इवेन फार्मूले से छूट के दायरे में नहीं होंगे। हम खुद कार पूल करके दफ्तर जाएंगे। ऑड इवेन फार्मूले के तौर पर ये आम आदमी पार्टी की सरकार का खतरनाक हो रहे दिल्ली के प्रदूषण पर ये पहला बड़ा और करारा हमला था। हालांकि दिल्ली सरकार को जब महीना भर पहले दिल्ली डॉयलॉग कमीशन के जानकारों ने बाकायदा एक डेमो करके ये सुझाव दिया। तब खुद अरविंद केजरीवाल समेत कई मंत्रियों के मन में इसे लागू करने को लेकर कई सवाल उमड़ घुमड़ रहे थे। लेकिन टीवी और अखबारों में जब सुबह बढ़ते प्रदूषण के आंकड़ों में आनंद विहार, पंजाबी बाग जैसे इलाके सुर्खियां बटोरते तो सरकार के माथे पर शिकन आना स्वाभाविक है। खुद अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि जब बीमारी गंभीर हो तो कड़वी दवा पीने के लिए तैयार रहना चाहिए। वायु प्रदूषण से हर साल 10 हज़ार लोगों की जान गंवाने के बाद अब दिल्ली वालों को भी इसके खतरे का अंदेशा हो चुका है। इसी के चलते दूसरे राजनीतिक दलों की आलोचनाओं के बावजूद ऑड इवेन फार्मूले को ज्यादातर दिल्लीवालों का समर्थन मिला है। ये शायद पहली बार जब लोगों ने इस फार्मूले को कायदे कानून से ज्यादा खुद के सेहत से जुड़ा मसला मानकर इसका खुद से पालन किया। हालांकि इस दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने भी मुस्तैदी से काम करके करीब दस हज़ार चालान काटे और सिविल डिफेंस के आठ हज़ार लोगों ने दिल्ली के चौराहे-चौराहे पर खड़े होकर लोगों को जागरुक किया। इस ऑड इवेन फार्मूले ने ये भी साबित किया कि अगर कानून के बारे में सरकार जनता को भरोसे में ले। सरकारी विभागों में बेहतर और सख्त तालमेल बिठाए तो कानून को लागू करवाने में दिक्कत नहीं आती है।
दिल्ली में फिर लागू होगा ऑड इवेन फार्मूला
आ़ड इवेन फार्मूला लागू होने के पहले दिन जब परिवहन मंत्री गोपाल राय डीटीसी की बस से दिल्ली का जायजा लेने निकले।
तो बीजेपी के मुख्यालय 24 अशोका रोड पर उनकी बस धीमी हुई। बीजेपी मुख्यालय के सामने खड़ी गाड़ियों के नंबर देखकर गोपाल राय भी हंसते बोले देखो बीजेपी इस फार्मूले की आलोचना तो कर रही है लेकिन कारों से आने वाले कार्यकर्ताओं ने इस फार्मूले को अपनाया है। यही वजह है कि ऑड इवेन फार्मूले की कामयाबी से सरकार का मनोबल बढ़ा है। दिल्ली वालों के फेफड़े को साफ रखने के लिए ये फार्मूला लागू किया गया था। लेकिन प्रदूषण से ज्यादा दिल्ली का ट्रैफिक आम दिनों की अपेक्षा करीब 30 फीसदी तक कम रहा। इससे लोग जाम से तो बचे ही साथ ही आने जाने में कम वक्त लगा। दस दिन पहले तक जो गोपाल राय इस फार्मूले को दोबारा लागू करने पर साफ जवाब देने से बचते थे वहीं मंत्री ऑड इवेन फार्मूले की समीक्षा के बाद जब मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने भरोसे के साथ कहा कि इसे दोबारा लागू किया जाएगा। लेकिन लागू करने से पहले हमें दो सवालों का जवाब खोजना होगा। पहला बच्चों के स्कूल खुलने के बाद जब हम ऑड इवेन फार्मूले को लागू करेंगे तो बच्चों को उनके माता या पिता कैसे छोड़ सकें और ला सके। इसके लिए या तो हम एक से तीन बजे तक छूट दें। दूसरा अगर इसे दोबारा लागू किया जाएगा तो लोगों का जोर पुरानी गाड़ियां खरीदने पर हो सकता है। इसका उपाय कैसे खोजा जाए।
क्या है ऑड इवेन फार्मूला
आड इवेन फार्मूला यानि सम विषण अंकगणित। गाड़ियों की नंबर प्लेट का आखिरी नंबर मसलन 0,2,4,6,8 जैसी सम नंबर की गाड़ियां इसी तारीख को चलेंगी। जबकि विषम नंबर की गाड़ियां मसलन 1,3,5,7,9 की तारीख को चलेंगे। दिल्ली में एक अंदाजे के 85 लाख गाड़ियां है इनमें से 19 लाख डीजल और पेट्रोल की कारें हैं। इस फार्मूले के लागू होने के बाद नौ लाख कारें अपने आप सड़कों से बाहर हो गई। हालांकि इसमें महिला ड्राईवरों, सीएनजी गाड़ियों को छूट देने की आलोचना भी हुई। सैकड़ों साल पहले रोमन सम्राज्य में ऑड इवेन फार्मूले पर अमल होने का इतिहास मिलता है। इसके बाद इसे मैक्सिको, बीजिंग और रोम जैसे शहरों में प्रदूषण को कम करने के लिए लागू किया गया। जो काफी सफल भी रहे हैं।
लेकिन हमारे यहां लोग हर समस्या के समाधान में दस समस्या निकालने में उस्ताद है। इसी के चलते इस फार्मूले को शुरुआती दौर में लागू करते वक्त बहुत सारे लोगों ने एक और कानून कहकर इसका मजाक भी उड़ाया। लेकिन अब इसकी कामयाबी उन शहरों के लिए भी एक नजीर है जो बढ़ते प्रदूषण के खतरे का सामना कर रहे हैं।
ऑड इवेन फार्मूले से इनको कोई फर्क नहीं पड़ा..
ऑड इवेन फार्मूला के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री,
जैसी डेढ़ दर्जन वीआईपी को छूट मिली थी। इसके दायरे में बाइक सवार, महिला चालक, विकलांग चालक या इमरजेंसी सेवाएं नहीं आती थी।
ऑड इवेन फार्मूले का प्रदूषण पर असर
दुनिया भर में दिल्ली पांचवा सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। दिल्ली सरकार का दावा है कि प्रदूषण में 20 से 25 फीसदी की कमी आई है। बाहरी दिल्ली जहां पीएम 2.5 का स्तर 900 क्यूबिक स्कावायर मीटर रहता था ऑड इवेन लागू रहने के दौरान 600 क्यूबिक स्क्वायर मीटर तक रहा। लेकिन उसके बावजूद दिल्ली का प्रदूषण गंभीर का श्रेणी में आता है। आईआईटी कानपुर के रिसर्च में हैरान करने वाले आंकड़े आए हैं. इसके मुताबिक दिल्ली का प्रदूषण बढ़ाने में सबसे ज्यादा हाथ धूल का है। दिल्ली में धूल से करीब 38 फीसदी पीएम2.5 और 56 फीसदी पीएम 10 होता है। इसके बाद 33 फीसदी प्रदूषण दो पहिया वाहन और 46 फीसदी प्रदूषण ट्रकों के जरिए होता है। जबकि कारों से 10 फीसदी प्रदूषण ही होता है। शायद इसी के चलते ऑड इवेन फार्मूले का उतना असर प्रदूषण पर नहीं पड़ा। लेकिन अगली बार इसका दायरा दोपहिया वाहन और ट्रको तक बढ़ाए जाने के बाद इस प्रभाव जरुर दिखेगा।
रवीश रंजन शुक्ला
(लेखक एनडीटीवी इंडिया से जुड़े हैं)
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