एक मुलाकात मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू के साथ
कुछ वक्त पहले मैं यूपी सदन में ठहरे एक दोस्त से मिलने गया था..चाय पीने के दौरान दोस्त ने कहा
दीदी से मिलोगे..मैने आश्चर्य से पूछा. दीदी..उसने कहा मुलायम सिंह जी की छोटी बहू यहीं रुकी हैं।
मैने कहा बिल्कुल मिलूंगा..उनके बारे में ज्यादा नहीं जानता था..मोदी की तारीफ करने पर विवाद पैदा हुआ था..
इसी तरह की कुछ खबरें उनके बारे में पढ़ी थी और समाजवादी पार्टी का गाना आओ मिलकर देश बचाना है..
नेता जी को दिल्ली पहुंचाना है..इसको एक आध बार समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम में सुन चुका था..उनसे मेरा परिचय बस
इसी के जरिए था..सुबह करीब 10 बज रहे थे..वो यूपी सदन के दूसरे माले के स्यूट में रुकी थी..
बाहर कुछ सुरक्षा कर्मी तैनात थे। मेरे दोस्त ने कहा जूता उतारना पड़ेगा क्योंकि छोटी बच्चा फर्श पर चलता है
इसके कारण दीदी भी जूता या चप्पल अंदर नहीं पहनती है।
मैं और मेरा दोस्त उस स्यूट के ड्राईंगरुमनुमा जगह पर बैठ गए..कमरे के अंदर से पूजा
करने की आवाज आ रही थी..मेरे जेहन में उप्र के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिला
की कई छवि उमड़-घुमड़ रही थी। लेकिन पांच सात मिनट इंतजार करने के बाद जब वो आई तो उनके पैरों में चप्पल नहीं थी..
दरम्याना कद और सिम्पली ब्यूटीफुल। उनके बारे में बस अंग्रेजी का यही शब्द लिख सकता हूं। यूनिवर्सिटी आफ मैनचेस्टर
से इंटरनेशनल रिलेशन में मास्टर की डिग्री ले चुकी हैं। जरुरत के मुताबिक ही अंग्रेजी बोलने वाली ये महिला मुलायम की
छोटी बहू और प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव हैं।
छोटे से औपचारिक परिचय के बाद बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ..वो हर्ष एनजीओ की ब्रॉड अंबेसडर हैं
इसके जरुए महिलाओं के बीच में पुलिस और सिस्टम के बारे में जागरुकता फैलाने का काम करती है।
उन्होंने कहा उप्र इतना बड़ा है और सामाजिक काम करने का इतना स्कोप है कि जितना काम करो उतना कम है।
वो कहती है पुलिस को लेकर समाज में काफी डर है खासतौर पर महिलाएं थाने जाने से घबराती है..
मैं उन्हें इस बारे में लगातार जागरुक कर रही हूं कि अपनी समस्याओं को लेकर वो बेखौफ थाने जाए और
शिकायत करे। वो एक मोबाइल ऐप भी लॉंच करने की सोच रही है जिससे मुसीबत के समय महिलाएं तुरंत
सहायता के लिए पुलिस से संपर्क साथ सके।
इन सारे विषयों पर चर्चा करने के बाद मैने माहौल को हल्का करने के लिए पूछा..प्रतीक से आपकी मुलाकात कैसे हो गई।
वो हंस पड़ी बोली हां मै लोरेटो कान्वेंट में पढ़ती थी.प्रतीक सीएमएस में पढ़ते थे..
वो मुझसे दो साल बड़े हैं..मैं जब 9 वीं क्लास में थी प्रतीक 11 वीं में थे..
तब मेरी मुलाकात एक छोटी सी बर्थ डे पार्टी में उनसे हुई थी।
प्रतीक की मां यानि मेरी सासु मां को पता था कि मैं गाना अच्छा गाती हूं..
उसी गाने ने जिंदगी को एक शानदार मोड़ दे दिया..मैने पूछा वो कौन सा गाना था..
वो झेंपते हुए बोली देवदास फिल्म का ये सिलसिला है प्यार का..
ये कहते हुए वो हंसने लगी..कहने लगी इस गाने के बाद
प्रतीक के याहू मैसेनजर पर कई मैसेज आए..मैने सात दिन बाद
ये मैसेज पढ़े..इतना सुनते ही हम लोग हंसने लगे..
मैने कहा शुक्र है आज का दौर नहीं था...
राजनीति को ना..
राजनीतिक परिवार की बहू किस नेता की तारीफ करती है किसकी बुराई ये हमेशा से लोगों के लिए दिलचस्पी का
विषय रहा है। मुलायम सिंह के प्रति सम्मान और अखिलेश की तारीफ के कसीदे सुनकर मैं बोला
इन दोनों को छोड़कर कौन से नेता को आप पसंद करती है..क्या मोदी अच्छा काम कर रहे हैं..
वो झिझकते बोली मोदी का फिलहाल का काम अच्छा है..लेकिन बदलते वक्त में उनकी क्या छवि मेरे दिमाग होगी..
कहना मुश्किल है..लेकिन गांधी जी और अमेरिका का राष्ट्रपति जॉन एफ केनडी की मैं प्रशंसक हूं।
लेकिन मैं खुद राजनीति नहीं करना चाहती हूं.बस समाज के लिए अच्छा काम कर सकूं..इसी पर मेरा फोकस है..
भातखंडे संगीत विद्यालय से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले चुकी अपर्णा यादव की मनपसंद ठुमरी..
अवध के नवाब वाजिद अली शाह की लिखी..बाबुल मोरा नईहय्यर छूटा जाए..
बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाती वो कहती है आज का मीडिया जिम्मेदार नहीं है..
किसी बात पर रिसर्च नहीं करता है..मेरे पिता भी टाइम्स आफ इंडिया के संपादक रहे हैं..
वो दौर था जब पत्रकार रिसर्च करके पूरी जिम्मेदारी से खबर लिखते थे..
आज का पत्रकार क्या लिख दे..कुछ पता नहीं है..
मैं हंसा मैने कहा ये आरोप वाजिब भी है और जरुरी भी..
कुछ देर बातचीत के सिलसिले के बाद मैने मोबाइल में समय देखा..
फिर अपर्णा यादव को देखकर मैं उठ खड़ा हुआ..
मैने कहा मैम फिर मिलेंगे..मैं आपके मुलाकात का ब्यौरा ब्लॉग पर लिखूंगा
तो नाराज तो नहीं होंगी..बदले में वो सौम्यता से हंस पड़ी..
कुछ वक्त पहले मैं यूपी सदन में ठहरे एक दोस्त से मिलने गया था..चाय पीने के दौरान दोस्त ने कहा
दीदी से मिलोगे..मैने आश्चर्य से पूछा. दीदी..उसने कहा मुलायम सिंह जी की छोटी बहू यहीं रुकी हैं।
मैने कहा बिल्कुल मिलूंगा..उनके बारे में ज्यादा नहीं जानता था..मोदी की तारीफ करने पर विवाद पैदा हुआ था..
इसी तरह की कुछ खबरें उनके बारे में पढ़ी थी और समाजवादी पार्टी का गाना आओ मिलकर देश बचाना है..
नेता जी को दिल्ली पहुंचाना है..इसको एक आध बार समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम में सुन चुका था..उनसे मेरा परिचय बस
इसी के जरिए था..सुबह करीब 10 बज रहे थे..वो यूपी सदन के दूसरे माले के स्यूट में रुकी थी..
बाहर कुछ सुरक्षा कर्मी तैनात थे। मेरे दोस्त ने कहा जूता उतारना पड़ेगा क्योंकि छोटी बच्चा फर्श पर चलता है
इसके कारण दीदी भी जूता या चप्पल अंदर नहीं पहनती है।
मैं और मेरा दोस्त उस स्यूट के ड्राईंगरुमनुमा जगह पर बैठ गए..कमरे के अंदर से पूजा
करने की आवाज आ रही थी..मेरे जेहन में उप्र के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिला
की कई छवि उमड़-घुमड़ रही थी। लेकिन पांच सात मिनट इंतजार करने के बाद जब वो आई तो उनके पैरों में चप्पल नहीं थी..
दरम्याना कद और सिम्पली ब्यूटीफुल। उनके बारे में बस अंग्रेजी का यही शब्द लिख सकता हूं। यूनिवर्सिटी आफ मैनचेस्टर
से इंटरनेशनल रिलेशन में मास्टर की डिग्री ले चुकी हैं। जरुरत के मुताबिक ही अंग्रेजी बोलने वाली ये महिला मुलायम की
छोटी बहू और प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव हैं।
छोटे से औपचारिक परिचय के बाद बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ..वो हर्ष एनजीओ की ब्रॉड अंबेसडर हैं
इसके जरुए महिलाओं के बीच में पुलिस और सिस्टम के बारे में जागरुकता फैलाने का काम करती है।
उन्होंने कहा उप्र इतना बड़ा है और सामाजिक काम करने का इतना स्कोप है कि जितना काम करो उतना कम है।
वो कहती है पुलिस को लेकर समाज में काफी डर है खासतौर पर महिलाएं थाने जाने से घबराती है..
मैं उन्हें इस बारे में लगातार जागरुक कर रही हूं कि अपनी समस्याओं को लेकर वो बेखौफ थाने जाए और
शिकायत करे। वो एक मोबाइल ऐप भी लॉंच करने की सोच रही है जिससे मुसीबत के समय महिलाएं तुरंत
सहायता के लिए पुलिस से संपर्क साथ सके।
इन सारे विषयों पर चर्चा करने के बाद मैने माहौल को हल्का करने के लिए पूछा..प्रतीक से आपकी मुलाकात कैसे हो गई।
वो हंस पड़ी बोली हां मै लोरेटो कान्वेंट में पढ़ती थी.प्रतीक सीएमएस में पढ़ते थे..
वो मुझसे दो साल बड़े हैं..मैं जब 9 वीं क्लास में थी प्रतीक 11 वीं में थे..
तब मेरी मुलाकात एक छोटी सी बर्थ डे पार्टी में उनसे हुई थी।
प्रतीक की मां यानि मेरी सासु मां को पता था कि मैं गाना अच्छा गाती हूं..
उसी गाने ने जिंदगी को एक शानदार मोड़ दे दिया..मैने पूछा वो कौन सा गाना था..
वो झेंपते हुए बोली देवदास फिल्म का ये सिलसिला है प्यार का..
ये कहते हुए वो हंसने लगी..कहने लगी इस गाने के बाद
प्रतीक के याहू मैसेनजर पर कई मैसेज आए..मैने सात दिन बाद
ये मैसेज पढ़े..इतना सुनते ही हम लोग हंसने लगे..
मैने कहा शुक्र है आज का दौर नहीं था...
राजनीति को ना..
राजनीतिक परिवार की बहू किस नेता की तारीफ करती है किसकी बुराई ये हमेशा से लोगों के लिए दिलचस्पी का
विषय रहा है। मुलायम सिंह के प्रति सम्मान और अखिलेश की तारीफ के कसीदे सुनकर मैं बोला
इन दोनों को छोड़कर कौन से नेता को आप पसंद करती है..क्या मोदी अच्छा काम कर रहे हैं..
वो झिझकते बोली मोदी का फिलहाल का काम अच्छा है..लेकिन बदलते वक्त में उनकी क्या छवि मेरे दिमाग होगी..
कहना मुश्किल है..लेकिन गांधी जी और अमेरिका का राष्ट्रपति जॉन एफ केनडी की मैं प्रशंसक हूं।
लेकिन मैं खुद राजनीति नहीं करना चाहती हूं.बस समाज के लिए अच्छा काम कर सकूं..इसी पर मेरा फोकस है..
भातखंडे संगीत विद्यालय से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले चुकी अपर्णा यादव की मनपसंद ठुमरी..
अवध के नवाब वाजिद अली शाह की लिखी..बाबुल मोरा नईहय्यर छूटा जाए..
बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाती वो कहती है आज का मीडिया जिम्मेदार नहीं है..
किसी बात पर रिसर्च नहीं करता है..मेरे पिता भी टाइम्स आफ इंडिया के संपादक रहे हैं..
वो दौर था जब पत्रकार रिसर्च करके पूरी जिम्मेदारी से खबर लिखते थे..
आज का पत्रकार क्या लिख दे..कुछ पता नहीं है..
मैं हंसा मैने कहा ये आरोप वाजिब भी है और जरुरी भी..
कुछ देर बातचीत के सिलसिले के बाद मैने मोबाइल में समय देखा..
फिर अपर्णा यादव को देखकर मैं उठ खड़ा हुआ..
मैने कहा मैम फिर मिलेंगे..मैं आपके मुलाकात का ब्यौरा ब्लॉग पर लिखूंगा
तो नाराज तो नहीं होंगी..बदले में वो सौम्यता से हंस पड़ी..



