Thursday, 14 August 2014

आजाद भारत के गुलाम मुद्दे

आजाद भारत के गुलाम मुद्दे
मोदी जी 15 अगस्त के दिन भी बड़ी बड़ी बातें करेंगे। मुझे पूरी उम्मीद है।
लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए आपके पास पूरे पांच साल और भारी बहुमत की एक बड़ी टीम है।
आपका समय अब से शुरू होता है।
अगर आपने काम नहीं पूरे किए तो इतिहास आपको उसी तरह बड़बोलेपन के लिए
याद करेगा जैसा मनमोहन सिंह को अतिचुप्पी के लिए याद करता है।
खैर हम अपने गिरेबां में भी झांके..हर मसले पर अपने अधिकार की याद दिलाते
हम खूब नेताओं और नौकरशाहों की लानत मिलानत करते हैं।
लेकिन हम दुनिया में सबसे बड़े झूठे, सबसे बड़े फ्राडिए,
खुद को होशियार समझने की बेवकूफी
,कहीं भी थूकने और मूतने के लिए जाने जाते हैं।
हम पहले हिंदू है जो मुसलमान और दूसरे धर्मों को देखना नहीं पसंद करते हैं।
लेकिन जब हमारी सत्ता थी तब हम गरीबों और दलितों
के लिए बेरहमी से मंदिरों के दरवाजे बंद कर रहे थे। ना हमने उन्हें सम्मान दिया ना लड़ने का अधिकार
दिया और ना ही प्रेम से साथ बैठने को कहा। जानवरों को पूज्यनीय माना लेकिन
आदमियों को उनसे बत्तर समझा। अगर हम इसी मानसिकता से आगे बढ़ते रहे मेरे भाईयों तो शायद
सच्ची आजादी केवल भावनात्मक नारों और गानों में ही हम मनाते रहेंगे। दुनिया में सिर्फ दो धर्म है
एक अमीर का दूसरा गरीब का। ज्यादा मंदिर या मस्जिद बनवाकर, ज्यादा बच्चे पैदा करके
ज्यादा धर्मांतरण करवा कर, दूसरे धर्मों के लोगों को मार कर कोई धर्म आगे नहीं बढ़ा है
अगर ऐसा होता तो जहां केवल मुसलमान है या सिर्फ हिंदू या सिर्फ क्रिश्चयन वाले देशों में दंगे फसाद
और नफरत होती ही नहीं। सड़क पर मंदिर या मस्जिद बनवाकर हम ऊपरवाले को अपने जैसे बेईमान
बनाने पर तुले है। लेकिन जब तक हम दूसरों का सम्मान नहीं करेंगे तब तक दुनिया में अगर एक धर्म के लोग आ भी जाए
तो मार काट चलती रहेगी, जैसी चल रही है। मुझे अपने देश से बड़ी उम्मीद है, 60 साल पहले भले हमने दुनिया को
एक मोमबत्ती भी नहीं दी। लेकिन आज हमने होमी जहांगीर भाभा की परमाणु थ्योरी, भटनागर-माथुर मैग्नेटिक इंटरफेयरेंस थ्योरी
बोस-आइंसस्टीन स्टैटिक्स दी। नई पीढ़ी के लोग देश और विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं। दुनिया अब हमारे टैलेंट से डरने लगी है।
हम अपने टैंलेंट को इसी तरह मानवता के काम में लगाते रहेंगे..इन्ही शब्दों के साथ जयहिंद

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