वो एक
शाम थी जब हम दोस्तों ने मिलकर पोखरा जाने की सोची। पोखरा में मेरे दोस्त नीरज मल्होत्रा का होटल था। उन्होंने भी काफी पोखरा जाकर घूमने के लिए उत्साहित किया। बहराईच से गोंडा के लिए सुबह ट्रेन पकड़ी..लेकिन जिन तीन दोस्तों ने जाने की बात कही थी। सुबह सुबह होते होते उनके साथ चलने की योजना खटाई में पड़ती दिखी..मैने सभी दोस्तों को एक मेसेज करके घर से निकल पड़ा। पयागपुर पहुंचते ही मेरे दोस्त महेद्र का फोन आया कि अकेले जा रहे हो..मैने गुस्से से कहा बिल्कुल..वो बोला इसी स्टेशन पर उतर जाओ मैं आ रहा हूं...
करीब 30 घंटे बाद वो डग्गामार जीप पर सवार होता हुआ पयागपुर पहुचा..मैं भी उस जीप में बैठ गया..10 बजे गोंडा से गोरखपुर के लिए तूफान एक्सप्रेस पकड़ी...और जब हम दोनों बस्ती पहुंच रहे थे ..तभी दो ्न्य दोस्त बलवंत और राजा का फोन आया..उन्होंने कहा कि गोरखपुर रुकों हम आ रहे हैं..दोपहर में हम गोरखपुर पहुंच गए लेकिन दो दोस्त शाम करीब 5 बजे वहां पहुंचे। हम एक कार लेकर सुनौली बोर्डर करीब 7 बजे तक पहुंचे।
10 बजे तक सुनौली बार्डर पर भारत और नेपाल की सीमा बंद हो जाती है। लेकिन हम साढ़े आठ बजे तक नेपाल के भैरवा जिले में पहुंच गए। वहां से एक ट्रैवेल एजेंसी की कार हमने 17 सौ नेपाली रुपए में हमने तय किया। एक सजी धजी सैंट्रो कार के अंदर नीली बत्ती जल रही थी..इसे एक नवजवान लड़का साफ कर रहा था। हमने पूछा तम्ही चलोगे क्या उसने कहा जी साब..रात करीब साढ़े नौ बजे हमारी यात्रा कार से भैरवा जिले से पोखरा की शुरू हुई। यहां से करीब साढ़े तीन सौ किमी पोखरा है। रातभर पहाड़ों के घुमावदार रास्तों से होते हुए करीब 4 बजे हम पोखरा जिले की सीमा में दाखिल होने लगा। ऐसा लगा कि बादलों और पहाड़ों से ढका कोई बड़ा से कटोरा रखा हो..खूबसूरत शहर प्राकृतिक संसोधनों से भरपूर सांस लेने पर लगा फेफड़ों के अंदर एक नम और ताजा हवा घुस रही हो...पोखरा का नाम एक तालाब से पड़ा। नेपाल में तालाब को लोग पोखरा बोलते हैं..शहर के बीचोबीच एक पड़ी सी झील है जिसके ईर्दगिर्द ये शहर बसा है...होटल कंफर्ट इन में हमारा कमरा पहले से बुक था..वहां के मैनेजर युबराज आचार्य बहुत सहयोगी और सपाट बोलने वाले शख्श है। हमने थोड़ी देर आराम किया..फिर दोपहर 12 बजे मैं सेविंग कराने नीचे गया..पता चला उस दुकान का नार् भी बिहार से आया था..बीते 15 साल से पोखरा में रह रहा था..यही स्थानीय लड़की से शादी करके बस गया था।
शेष फिर



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