https://www.youtube.com/watch?v=6gASf3Inxh0
Monday, 25 August 2014
मेरी पोखरा यात्रा
वो एक
शाम थी जब हम दोस्तों ने मिलकर पोखरा जाने की सोची। पोखरा में मेरे दोस्त नीरज मल्होत्रा का होटल था। उन्होंने भी काफी पोखरा जाकर घूमने के लिए उत्साहित किया। बहराईच से गोंडा के लिए सुबह ट्रेन पकड़ी..लेकिन जिन तीन दोस्तों ने जाने की बात कही थी। सुबह सुबह होते होते उनके साथ चलने की योजना खटाई में पड़ती दिखी..मैने सभी दोस्तों को एक मेसेज करके घर से निकल पड़ा। पयागपुर पहुंचते ही मेरे दोस्त महेद्र का फोन आया कि अकेले जा रहे हो..मैने गुस्से से कहा बिल्कुल..वो बोला इसी स्टेशन पर उतर जाओ मैं आ रहा हूं...
करीब 30 घंटे बाद वो डग्गामार जीप पर सवार होता हुआ पयागपुर पहुचा..मैं भी उस जीप में बैठ गया..10 बजे गोंडा से गोरखपुर के लिए तूफान एक्सप्रेस पकड़ी...और जब हम दोनों बस्ती पहुंच रहे थे ..तभी दो ्न्य दोस्त बलवंत और राजा का फोन आया..उन्होंने कहा कि गोरखपुर रुकों हम आ रहे हैं..दोपहर में हम गोरखपुर पहुंच गए लेकिन दो दोस्त शाम करीब 5 बजे वहां पहुंचे। हम एक कार लेकर सुनौली बोर्डर करीब 7 बजे तक पहुंचे।
10 बजे तक सुनौली बार्डर पर भारत और नेपाल की सीमा बंद हो जाती है। लेकिन हम साढ़े आठ बजे तक नेपाल के भैरवा जिले में पहुंच गए। वहां से एक ट्रैवेल एजेंसी की कार हमने 17 सौ नेपाली रुपए में हमने तय किया। एक सजी धजी सैंट्रो कार के अंदर नीली बत्ती जल रही थी..इसे एक नवजवान लड़का साफ कर रहा था। हमने पूछा तम्ही चलोगे क्या उसने कहा जी साब..रात करीब साढ़े नौ बजे हमारी यात्रा कार से भैरवा जिले से पोखरा की शुरू हुई। यहां से करीब साढ़े तीन सौ किमी पोखरा है। रातभर पहाड़ों के घुमावदार रास्तों से होते हुए करीब 4 बजे हम पोखरा जिले की सीमा में दाखिल होने लगा। ऐसा लगा कि बादलों और पहाड़ों से ढका कोई बड़ा से कटोरा रखा हो..खूबसूरत शहर प्राकृतिक संसोधनों से भरपूर सांस लेने पर लगा फेफड़ों के अंदर एक नम और ताजा हवा घुस रही हो...पोखरा का नाम एक तालाब से पड़ा। नेपाल में तालाब को लोग पोखरा बोलते हैं..शहर के बीचोबीच एक पड़ी सी झील है जिसके ईर्दगिर्द ये शहर बसा है...होटल कंफर्ट इन में हमारा कमरा पहले से बुक था..वहां के मैनेजर युबराज आचार्य बहुत सहयोगी और सपाट बोलने वाले शख्श है। हमने थोड़ी देर आराम किया..फिर दोपहर 12 बजे मैं सेविंग कराने नीचे गया..पता चला उस दुकान का नार् भी बिहार से आया था..बीते 15 साल से पोखरा में रह रहा था..यही स्थानीय लड़की से शादी करके बस गया था।
शेष फिर
Saturday, 16 August 2014
बाढ़ ने मचाई तबाही
नेपाल के पानी से यूपी के तराई में तबाही
नेपाल के अलग-अलग बैराज से छोड़े गए 10 लाख क्यूसेक पानी ने उप्र के तराई में भारी तबाही मचा दी है।
बहराईच में घाघरा और श्रावस्ती की राप्ती नदी उफान पर है। इन दोनों ही जिलों में करीब 400 से ज्यादा गांव में पानी भर गया है
और हजारों हेक्टेयर खेत पानी में डूब गए। इन दोनों ही जिलों में 100 से ज्यादा लोग लापता और 2 लाख से ज्यादा आबादी इस बाढ़ से प्रभावित हैं। नेपाल से छोड़ा गया पानी इतनी तेजी से इन जिलों में आया
कि जानबचाकर भाग रहे कई लोग पानी में बह गए। शुक्रवार रात को बहराईच के महसी तहसील में घाघरा नदी का पानी घुसने लगा।
पिपरी गांव के पेशकार यादव रात में अपना सामना लादकर जैसे ही सुरक्षित जगह जाने लगे। इनकी बेटी रामप्यारी और बेटा देवकी
गहरे पानी में जा गिरे। पानी उनकी लाश झाड़ियों में फंसी मिली।
राप्ती और घाघरा का कहर
आमतौर सामान्य सी नदी की तरह बहने वाली राप्ती नदीं खतरे के निशान से 10 मीटर ऊपर बह रही है। ये नदी नेपाल के चितवन घाटी से निकलती है।
नेपाल में भारी बारिश और बादल फटने के चलते राप्ती नदी में अचानक बाढ़ आ गई। श्रावस्ती जिले में नदी का पानी करीब 200 से ज्यादा गांव में भर गया है।
बहराईच-श्रावस्ती 4 लेन सड़क के ऊपर से नदी का पानी बह रहा है। 200 मीटर तक सड़क पूरी तरह गायब हो गई है। जिसके चलते श्रावस्ती दूसरे जिलों से कट गया है।
यही नदी बाद में घाघरा नदीं में मिल जाती है। घाघरा नदीं ने बहराईच के महसी, मिहींपुरवा, नानपारा तहसील में भयानक तबाही मचाई है। नदी का जलस्तर अगर बढ़ा तो
बहराईच-लखनऊ राजमार्ग को भी बंद किया जा सकता है। घाघरा नदी ने कई गांवों का अस्तित्व लगभग खत्म कर दिया है। गोंडा से बहराईच ब्रॉड गेज की रेलवे लाइन बाढ़ की वजह से
बंद कर दी गई है।
बाढ़ के लिए कोई चेतावनी नहीं
हर साल नेपाल में छोड़े गए पानी से उप्र के तराई जिलों में बाढ़ आती है। लेकिन अब तक कोई ऐसी हल नहीं खोजा जा सका है।
ताकि पानी छोड़े जाने से पहले इन जिलों के अधिकारी इसके बचाव के लिए कदम उठा पाए। बहराईच के डीएम कहते हैं कि नेपाल के करनाली नदी में पानी बढ़ने से
बाढ़ आई। लेकिन इसकी पहले से सूचना नहीं दी गई। सवाल ये उठता है कि हर साल इस तरह की बाढ़ के बावजूद क्यों इसका समाधान नहीं खोजा गया।
खबर है कि नेपाल की तरफ से आने वाली करनाली नदीं का पानी कार्तिनिया घाट सेंचुरी में घुस गया। बहुत सारे जंगली जानवरों के मारे जाने से आशंका है।
यहां से सटे मिहीपुरवा इलाके के कई गांव पानी से घिरे हैं। नावों की कमी के चलते बहुत सारे लोगों को उनके घरों से नहीं निकाला जा सका है। धुसुवा के वीरेंद्र प्रताप सिंह
कॉलेज के प्राचार्य विवेक प्रताप सिंह बताते हैं कि श्रावस्ती के रास्ते कटे होने के चलते राहत का सामान और बचाव कर्मी भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। श्रावस्ती जिले के ज्यादातर
सरकारी दफ्तरों में पानी भरा है। आने वाले समय में स्वास्थ्य महकमा को भी मुस्तैद होना पड़ेगा क्योंकि बाढ़ के उतरते पानी से डायरिया का बड़ा संकट जिले में मंडरा रहा है।
नेपाल के पानी से यूपी के तराई में तबाही
नेपाल के अलग-अलग बैराज से छोड़े गए 10 लाख क्यूसेक पानी ने उप्र के तराई में भारी तबाही मचा दी है।
बहराईच में घाघरा और श्रावस्ती की राप्ती नदी उफान पर है। इन दोनों ही जिलों में करीब 400 से ज्यादा गांव में पानी भर गया है
और हजारों हेक्टेयर खेत पानी में डूब गए। इन दोनों ही जिलों में 100 से ज्यादा लोग लापता और 2 लाख से ज्यादा आबादी इस बाढ़ से प्रभावित हैं। नेपाल से छोड़ा गया पानी इतनी तेजी से इन जिलों में आया
कि जानबचाकर भाग रहे कई लोग पानी में बह गए। शुक्रवार रात को बहराईच के महसी तहसील में घाघरा नदी का पानी घुसने लगा।
पिपरी गांव के पेशकार यादव रात में अपना सामना लादकर जैसे ही सुरक्षित जगह जाने लगे। इनकी बेटी रामप्यारी और बेटा देवकी
गहरे पानी में जा गिरे। पानी उनकी लाश झाड़ियों में फंसी मिली।
राप्ती और घाघरा का कहर
आमतौर सामान्य सी नदी की तरह बहने वाली राप्ती नदीं खतरे के निशान से 10 मीटर ऊपर बह रही है। ये नदी नेपाल के चितवन घाटी से निकलती है।
नेपाल में भारी बारिश और बादल फटने के चलते राप्ती नदी में अचानक बाढ़ आ गई। श्रावस्ती जिले में नदी का पानी करीब 200 से ज्यादा गांव में भर गया है।
बहराईच-श्रावस्ती 4 लेन सड़क के ऊपर से नदी का पानी बह रहा है। 200 मीटर तक सड़क पूरी तरह गायब हो गई है। जिसके चलते श्रावस्ती दूसरे जिलों से कट गया है।
यही नदी बाद में घाघरा नदीं में मिल जाती है। घाघरा नदीं ने बहराईच के महसी, मिहींपुरवा, नानपारा तहसील में भयानक तबाही मचाई है। नदी का जलस्तर अगर बढ़ा तो
बहराईच-लखनऊ राजमार्ग को भी बंद किया जा सकता है। घाघरा नदी ने कई गांवों का अस्तित्व लगभग खत्म कर दिया है। गोंडा से बहराईच ब्रॉड गेज की रेलवे लाइन बाढ़ की वजह से
बंद कर दी गई है।
बाढ़ के लिए कोई चेतावनी नहीं
हर साल नेपाल में छोड़े गए पानी से उप्र के तराई जिलों में बाढ़ आती है। लेकिन अब तक कोई ऐसी हल नहीं खोजा जा सका है।
ताकि पानी छोड़े जाने से पहले इन जिलों के अधिकारी इसके बचाव के लिए कदम उठा पाए। बहराईच के डीएम कहते हैं कि नेपाल के करनाली नदी में पानी बढ़ने से
बाढ़ आई। लेकिन इसकी पहले से सूचना नहीं दी गई। सवाल ये उठता है कि हर साल इस तरह की बाढ़ के बावजूद क्यों इसका समाधान नहीं खोजा गया।
खबर है कि नेपाल की तरफ से आने वाली करनाली नदीं का पानी कार्तिनिया घाट सेंचुरी में घुस गया। बहुत सारे जंगली जानवरों के मारे जाने से आशंका है।
यहां से सटे मिहीपुरवा इलाके के कई गांव पानी से घिरे हैं। नावों की कमी के चलते बहुत सारे लोगों को उनके घरों से नहीं निकाला जा सका है। धुसुवा के वीरेंद्र प्रताप सिंह
कॉलेज के प्राचार्य विवेक प्रताप सिंह बताते हैं कि श्रावस्ती के रास्ते कटे होने के चलते राहत का सामान और बचाव कर्मी भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। श्रावस्ती जिले के ज्यादातर
सरकारी दफ्तरों में पानी भरा है। आने वाले समय में स्वास्थ्य महकमा को भी मुस्तैद होना पड़ेगा क्योंकि बाढ़ के उतरते पानी से डायरिया का बड़ा संकट जिले में मंडरा रहा है।
Thursday, 14 August 2014
आजाद भारत के गुलाम मुद्दे
आजाद भारत के गुलाम मुद्दे
मोदी जी 15 अगस्त के दिन भी बड़ी बड़ी बातें करेंगे। मुझे पूरी उम्मीद है।
लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए आपके पास पूरे पांच साल और भारी बहुमत की एक बड़ी टीम है।
आपका समय अब से शुरू होता है।
अगर आपने काम नहीं पूरे किए तो इतिहास आपको उसी तरह बड़बोलेपन के लिए
याद करेगा जैसा मनमोहन सिंह को अतिचुप्पी के लिए याद करता है।
खैर हम अपने गिरेबां में भी झांके..हर मसले पर अपने अधिकार की याद दिलाते
हम खूब नेताओं और नौकरशाहों की लानत मिलानत करते हैं।
लेकिन हम दुनिया में सबसे बड़े झूठे, सबसे बड़े फ्राडिए,
खुद को होशियार समझने की बेवकूफी
,कहीं भी थूकने और मूतने के लिए जाने जाते हैं।
हम पहले हिंदू है जो मुसलमान और दूसरे धर्मों को देखना नहीं पसंद करते हैं।
लेकिन जब हमारी सत्ता थी तब हम गरीबों और दलितों
के लिए बेरहमी से मंदिरों के दरवाजे बंद कर रहे थे। ना हमने उन्हें सम्मान दिया ना लड़ने का अधिकार
दिया और ना ही प्रेम से साथ बैठने को कहा। जानवरों को पूज्यनीय माना लेकिन
आदमियों को उनसे बत्तर समझा। अगर हम इसी मानसिकता से आगे बढ़ते रहे मेरे भाईयों तो शायद
सच्ची आजादी केवल भावनात्मक नारों और गानों में ही हम मनाते रहेंगे। दुनिया में सिर्फ दो धर्म है
एक अमीर का दूसरा गरीब का। ज्यादा मंदिर या मस्जिद बनवाकर, ज्यादा बच्चे पैदा करके
ज्यादा धर्मांतरण करवा कर, दूसरे धर्मों के लोगों को मार कर कोई धर्म आगे नहीं बढ़ा है
अगर ऐसा होता तो जहां केवल मुसलमान है या सिर्फ हिंदू या सिर्फ क्रिश्चयन वाले देशों में दंगे फसाद
और नफरत होती ही नहीं। सड़क पर मंदिर या मस्जिद बनवाकर हम ऊपरवाले को अपने जैसे बेईमान
बनाने पर तुले है। लेकिन जब तक हम दूसरों का सम्मान नहीं करेंगे तब तक दुनिया में अगर एक धर्म के लोग आ भी जाए
तो मार काट चलती रहेगी, जैसी चल रही है। मुझे अपने देश से बड़ी उम्मीद है, 60 साल पहले भले हमने दुनिया को
एक मोमबत्ती भी नहीं दी। लेकिन आज हमने होमी जहांगीर भाभा की परमाणु थ्योरी, भटनागर-माथुर मैग्नेटिक इंटरफेयरेंस थ्योरी
बोस-आइंसस्टीन स्टैटिक्स दी। नई पीढ़ी के लोग देश और विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं। दुनिया अब हमारे टैलेंट से डरने लगी है।
हम अपने टैंलेंट को इसी तरह मानवता के काम में लगाते रहेंगे..इन्ही शब्दों के साथ जयहिंद
लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए आपके पास पूरे पांच साल और भारी बहुमत की एक बड़ी टीम है।
आपका समय अब से शुरू होता है।
अगर आपने काम नहीं पूरे किए तो इतिहास आपको उसी तरह बड़बोलेपन के लिए
याद करेगा जैसा मनमोहन सिंह को अतिचुप्पी के लिए याद करता है।
खैर हम अपने गिरेबां में भी झांके..हर मसले पर अपने अधिकार की याद दिलाते
हम खूब नेताओं और नौकरशाहों की लानत मिलानत करते हैं।
लेकिन हम दुनिया में सबसे बड़े झूठे, सबसे बड़े फ्राडिए,
खुद को होशियार समझने की बेवकूफी
,कहीं भी थूकने और मूतने के लिए जाने जाते हैं।
हम पहले हिंदू है जो मुसलमान और दूसरे धर्मों को देखना नहीं पसंद करते हैं।
लेकिन जब हमारी सत्ता थी तब हम गरीबों और दलितों
के लिए बेरहमी से मंदिरों के दरवाजे बंद कर रहे थे। ना हमने उन्हें सम्मान दिया ना लड़ने का अधिकार
दिया और ना ही प्रेम से साथ बैठने को कहा। जानवरों को पूज्यनीय माना लेकिन
आदमियों को उनसे बत्तर समझा। अगर हम इसी मानसिकता से आगे बढ़ते रहे मेरे भाईयों तो शायद
सच्ची आजादी केवल भावनात्मक नारों और गानों में ही हम मनाते रहेंगे। दुनिया में सिर्फ दो धर्म है
एक अमीर का दूसरा गरीब का। ज्यादा मंदिर या मस्जिद बनवाकर, ज्यादा बच्चे पैदा करके
ज्यादा धर्मांतरण करवा कर, दूसरे धर्मों के लोगों को मार कर कोई धर्म आगे नहीं बढ़ा है
अगर ऐसा होता तो जहां केवल मुसलमान है या सिर्फ हिंदू या सिर्फ क्रिश्चयन वाले देशों में दंगे फसाद
और नफरत होती ही नहीं। सड़क पर मंदिर या मस्जिद बनवाकर हम ऊपरवाले को अपने जैसे बेईमान
बनाने पर तुले है। लेकिन जब तक हम दूसरों का सम्मान नहीं करेंगे तब तक दुनिया में अगर एक धर्म के लोग आ भी जाए
तो मार काट चलती रहेगी, जैसी चल रही है। मुझे अपने देश से बड़ी उम्मीद है, 60 साल पहले भले हमने दुनिया को
एक मोमबत्ती भी नहीं दी। लेकिन आज हमने होमी जहांगीर भाभा की परमाणु थ्योरी, भटनागर-माथुर मैग्नेटिक इंटरफेयरेंस थ्योरी
बोस-आइंसस्टीन स्टैटिक्स दी। नई पीढ़ी के लोग देश और विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं। दुनिया अब हमारे टैलेंट से डरने लगी है।
हम अपने टैंलेंट को इसी तरह मानवता के काम में लगाते रहेंगे..इन्ही शब्दों के साथ जयहिंद
Sunday, 3 August 2014
श्रावस्ती का चुनाव
गौतम बुद्ध की नगरी श्रावस्ती के मुख्यालय भिन्गा से 40 किमी दूर सेमरहना के छोटे से गांव में टाटा फाचूर्नर से लेकर सफारी तक घूल से लस्त पस्त रंग बिरंगे झंडे लगाए घूम रही है..हां..नेताओं के पीछे तो आदमी नहीं है लेकिन इन गाड़ियों के पीछे फटी बनियान और बिना नेकर के छोटे बच्चों का हूजूम जरुर है। .आम के बगिया में गाड़ी रुकने के साथ ही धूल की एक आंधी हमारे सर से निकल गई। गांव में हल्ला हुआ..नेयता आए है बहुत बड़े गुंडे रहे हैं..इलाहाबाद के..सबसे पहले यही परिचय उनके लगुवा भगुवा नेता न...े हमारे चाचा के कान में फुसफुसाकर दिया। उनके चेहरे पर काली मूंछो का स्याह फैलावट..ओंटों पर दबंग मुस्कान..गले लगाने की नई आदत से गुलजार समाजवादी पार्टी के माफिया डॉन अतीक अहमद राजनीतिक दीक्षा लेने के लिए हमारे गांव की धूल फांक रहे हैं..यहां से 90किलो मीटर दूर बहराईच में कैसरगंज से माफिया ब्रजभूषण सिंह मुलायम सिंह का पहले नाम जप रहे थे इस बार मोदी की ताजपोसी का बहाना लेकर वोटरों को लुभाने में लगे हैं..हमारा जिला आजकल राजनीतिक कचराघर बन गया है..कैसरगंज से चार बार सांसद रह चुके बेनी प्रसाद वर्मा से लेकर निवर्तमान सांसद ब्रजभूषण सिंह ने लोगों को निराश करने के अलावा कुछ नहीं किया है। करीब 49 फीसदी साक्षरता दर वाला श्रावस्ती अति पिछड़े शहरों में आता है भारत सरकार इसे फंड भी देती है लेकिन ये फंड कहां से आता है और कहां चला जाता है कुछ पता नहीं..पिछली बार यहां से कांग्रेस के सांसद विनय कुमार पांडेय थे..क्षेत्र में जाने से ज्यादा ये टीवी डिबेट में आते थे..मेरी भी पहली मुलाकात इनसे एनडीटीवी के दफ्तर में ही हुई थी...माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने इस शहर में 24 चतुर्मास किया था..कई एतिहासिक धरोहरे मसलन डाकू अंगुलीमार की गुफा, बौद्ध स्तूप भी है..लेकिन अतीक अहमद और रिजवान जहीर जैसे आपराधिक औजारों से लैस लोग यहां से नेता बनने की फिराक में है। ..मैं जानता हूं कि श्रावस्ती जैसे शहरों में रहने वाले सीधे मेहनती लोगों को बेवकूफ बनाकर जाति धर्म के आधार पर वोट कराना सबसे आसान है.... ये इसी पर वोट करेंगे भी।लेकिन फिर भी मेरे जैसे बाशिंदे निराश नहीं है..राहत इंदौरी का शेर हिम्मत पैदा करता है..
.खुष्क दरियाओ में हल्की सी रवानी और है, रेत के नीचे अभी थोड़ा सा पानी और है,
जो भी मिलता है उसे अपना समझ लेता हूं मैं, एक बीमारी मुझे ये खानदारी और है..
.खुष्क दरियाओ में हल्की सी रवानी और है, रेत के नीचे अभी थोड़ा सा पानी और है,
जो भी मिलता है उसे अपना समझ लेता हूं मैं, एक बीमारी मुझे ये खानदारी और है..
(लेखक के अपने निजी विचार है..इनका किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है)
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